हरियाणा मंत्रिमंडल ने अंतर-राज्यीय पारगमन पास (आईएसटीपी) ढांचे के कार्यान्वयन हेतु खनिज खनन नियमों में संशोधन को मंज़ूरी दी

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राज्य में आने वाले खनिज से भरे वाहनों पर 80 रुपये प्रति मीट्रिक टन आईएसटीपी शुल्क लगेगा  

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अंतर-राज्यीय पारगमन पास (आईएसटीपी) ढांचे के कार्यान्वयन हेतु अध्याय 15 में नियम 98ए के उप-नियम 14 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके अलावा ,  “हरियाणा माइनर मिनरल कन्सेशन , स्टॉकिंग , ट्रांसपोर्टेशन ऑफ़ मिनरल्स एंड प्रिवेंशन ऑफ़ इल्लीगल माइनिंग रूल्स ,2012” के रूल्स  9(5) एंड 10(3) के अंतर्गत रॉयल्टी दरों के संशोधन को मंज़ूरी दी गई।

इन नियमों को हरियाणा लघु खनिज रियायत, भण्डारण, खनिजों का परिवहन एवं अवैध खनन निवारण नियम (संशोधन) नियम, 2025 कहा जायेगा।

नियम 98ए के उप-नियम 14 में संशोधन के पश्चात, हरियाणा के भीतर आने वाले सभी खनिज से लदे वाहनों और राज्य के बाहर के स्थानों पर खनिजों का परिवहन करने वाले वाहनों पर अब 80 रुपये प्रति मीट्रिक टन शुल्क लगेगा। 

इसी प्रकार, पत्थर और बोल्डर पर रॉयल्टी लगाने से संबंधित प्रथम अनुसूची के नियम में संशोधन के पश्चात इनकी रॉयल्टी की दर 80 रुपये प्रति मीट्रिक टन होगी।

इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने प्रथम अनुसूची में खंड 17 को हटाने की भी मंजूरी दे दी है, अर्थात, मुख्य खनिज के पट्टाधारकों को संबद्ध लघु खनिज के लिए आवेदन पर नियम 10 के तहत दिए गए खनन पट्टे के मामले में, उक्त लघु खनिज के लिए रॉयल्टी की दर ऊपर दिए गए कॉलमों में निर्धारित खनिज के लिए लागू दरों के अतिरिक्त 25 प्रतिशत होगी।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता अवैध खनन को रोकना और अच्छे ढंग से खनिज परिवहन की निगरानी सुनिश्चित करना है। हरियाणा की भौगोलिक स्थिति और छह पड़ोसी राज्यों से आने वाले खनिज यातायात को देखते हुए, आईएसटीपी का कार्यान्वयन महत्वपूर्ण है। आईएसटीपी शुल्क से प्राप्त धनराशि का उपयोग बुनियादी ढाँचे जैसे चेक पोस्ट और गेट, निगरानी वाले कैमरे और एआई-आधारित ट्रैकिंग, क्यूआर-कोड सक्षम ई-चालान प्रणाली, मुख्य सड़कों की निगरानी के लिए अन्य तकनीकें और खनन क्षेत्रों से खनन सामग्री के परिवहन की दक्षता बढ़ाने के लिए रसद सहायता में सुधार के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, एमएमडीआर अधिनियम की धारा 15 और 23सी राज्य को ऐसे नियामक शुल्क लगाने का अधिकार देती है। 

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