हरियाणा में चल रहे विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को सियासी माहौल उस समय गरमा गया जब कांग्रेस ने विधानसभा घेराव का प्रयास किया। विपक्षी दल के इस विरोध प्रदर्शन ने राजधानी की सड़कों को राजनीतिक रणक्षेत्र में बदल दिया, जहां सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए।

नेता प्रतिपक्ष Bhupinder Singh Hooda के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विधानसभा की ओर पैदल मार्च शुरू किया। यह मार्च सरकार के खिलाफ जनआक्रोश और राजनीतिक असंतोष का प्रतीक बनकर उभरा। कांग्रेस का आरोप था कि राज्य सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान भटका रही है और बजट सत्र केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।
हालांकि, मार्च विधानसभा तक पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। सेक्टर-9 क्षेत्र में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर कांग्रेस नेताओं के काफिले को रोक दिया। इसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को हिरासत में ले लिया।
हिरासत में लिए गए नेताओं में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Uday Bhan, विधायक Ashok Arora, वरिष्ठ नेता Aditya Surjewala सहित कई विधायक और पार्टी पदाधिकारी शामिल हैं। कार्यकर्ताओं और नेताओं को जबरन रोके जाने से मौके पर नारेबाज़ी और विरोध प्रदर्शन तेज हो गया, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण बन गया।
बजट सत्र बनाम जनआंदोलन की राजनीति
कांग्रेस का यह प्रदर्शन केवल विधानसभा घेराव तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक संदेश का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बजट सत्र जनता की समस्याओं के समाधान का मंच होना चाहिए था, लेकिन सरकार इसे सत्ता प्रदर्शन और औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित कर रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि बेरोज़गारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, सामाजिक असंतोष और प्रशासनिक विफलताओं जैसे मुद्दों पर सरकार जवाबदेही से बच रही है। इसी के विरोध में विधानसभा घेराव का फैसला लिया गया था, ताकि जनभावनाओं को सड़क से सदन तक पहुंचाया जा सके।
पुलिस कार्रवाई से और तेज हुई सियासत
नेताओं की हिरासत के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। बजट सत्र के दौरान विपक्ष का आक्रामक रुख और सरकार की सख्ती, दोनों मिलकर हरियाणा की राजनीति को एक नए टकराव के दौर में ले जाते दिख रहे हैं।
विधानसभा से सड़क तक संघर्ष की राजनीति
यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि हरियाणा की राजनीति अब सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रह गई है। संघर्ष की राजनीति सड़क पर उतर चुकी है, जहां कांग्रेस खुद को जनआवाज़ के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है और सरकार व्यवस्था व नियंत्रण की राजनीति पर जोर दे रही है।
बजट सत्र के बीच हुआ यह घटनाक्रम आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों का ट्रेलर माना जा रहा है, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की पूरी संभावना है। यह केवल एक घेराव नहीं, बल्कि हरियाणा की राजनीति में उभरते सत्ता बनाम सड़क के संघर्ष का संकेत है।

