आरबीआई के मुनाफे पर बढ़ी सियासत, हरपाल चीमा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर उठाए सवाल

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिशेष मुनाफे से केंद्र सरकार को मिली बड़ी राशि को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पंजाब सरकार के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि आरबीआई के मुनाफे में देश के सभी राज्यों का हिस्सा शामिल होता है और इस राशि का लाभ राज्यों को भी मिलना चाहिए।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के प्रॉफिट से प्राप्त लगभग ₹2.87 लाख करोड़ की राशि को केवल केंद्र तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि देश की अर्थव्यवस्था और कर व्यवस्था में राज्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए इस रकम का न्यायसंगत वितरण सभी राज्यों के बीच किया जाना चाहिए।

चीमा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार किसी भी राज्य का वित्तीय अधिकार नहीं छीन सकती और संघीय ढांचे की भावना के अनुसार राज्यों को उनका हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और कई राज्यों को विकास योजनाओं तथा सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता है। ऐसे में आरबीआई से प्राप्त इतनी बड़ी राशि को साझा करने की मांग स्वाभाविक है।

पंजाब के वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार की आर्थिक रणनीति पर भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश का वित्तीय प्रबंधन संतुलित तरीके से नहीं चलाया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कभी आरबीआई के अधिशेष फंड पर निर्भर हो रही है तो कभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के जरिए आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है।

हरपाल चीमा ने यह भी कहा कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है। उनके अनुसार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से परिवहन लागत, खाद्य पदार्थों की कीमतें और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के खर्च में वृद्धि होती है, जिसका सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और गरीब तबके पर पड़ता है।

उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति और आर्थिक नीति को लेकर भी सवाल उठाए। चीमा का कहना था कि वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार की नीतियां अपेक्षित परिणाम देने में सफल नहीं हो रही हैं। उनका आरोप था कि बढ़ती महंगाई, ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक दबावों ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई के अधिशेष फंड को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच बहस नई नहीं है, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील बन गया है। कई राज्य सरकारें लगातार यह मांग उठाती रही हैं कि केंद्र को राजस्व और वित्तीय संसाधनों के वितरण में अधिक पारदर्शिता और संतुलन अपनाना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर अपने अधिशेष मुनाफे का एक हिस्सा केंद्र सरकार को हस्तांतरित करता है। यह राशि सरकार के राजकोषीय प्रबंधन और खर्चों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि विपक्षी दल अक्सर यह सवाल उठाते रहे हैं कि इस तरह की रकम का इस्तेमाल किस प्रकार किया जा रहा है और क्या राज्यों को पर्याप्त वित्तीय समर्थन मिल रहा है।

पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार लगातार केंद्र की आर्थिक नीतियों और वित्तीय फैसलों को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाती रही है। ऐसे में हरपाल सिंह चीमा का यह बयान केवल आर्थिक टिप्पणी नहीं बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच बढ़ती राजनीतिक बहस का हिस्सा भी माना जा रहा है।

फिलहाल आरबीआई के अधिशेष फंड और बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर देश में आर्थिक और राजनीतिक चर्चा तेज हो चुकी है। आने वाले समय में यह मुद्दा संसद से लेकर राज्यों की राजनीति तक और अधिक गर्मा सकता है, क्योंकि महंगाई और वित्तीय संसाधनों का सवाल सीधे आम जनता और राज्य सरकारों दोनों से जुड़ा हुआ है।

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