हरियाणा ने सर्टिफाइड ज़मीन के रिकॉर्ड ऑनलाइन किए

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ज़मीन से जुड़ी सेवाओं को तेज़, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने के मकसद से नागरिकों के लिए एक बड़ा सुधार करते हुए, हरियाणा सरकार ने एक ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया है। इससे लोग रेवेन्यू ऑफिस जाए बिना जमाबंदी, म्यूटेशन, फर्द बदर और रजिस्टर्ड सेल डीड की डिजिटल रूप से सर्टिफाइड कॉपी के लिए अप्लाई कर सकते हैं और उन्हें हासिल कर सकते हैं।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि विभाग ने ‘रेवेन्यू हरियाणा पोर्टल’ पर नया मॉड्यूल शुरू किया है, जिससे नागरिक एक आसान ऑनलाइन प्रोसेस के ज़रिए सर्टिफाइड ज़मीन के रिकॉर्ड हासिल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सभी डिविजनल कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर को पूरे राज्य में इस सिस्टम को एक जैसा लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे आसानी से लागू करने के लिए डिपार्टमेंट ने रेवेन्यू अधिकारियों के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और नागरिकों के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइडेंस वाला एक डिटेल्ड यूज़र मैनुअल भी तैयार किया है।

 डॉ. मिश्रा ने कहा कि आवेदक ओटीपी ऑथेंटिकेशन के ज़रिए अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं और ज़रूरी डॉक्यूमेंट चुनकर और ज़िला, तहसील और गाँव जैसी जानकारी भरकर एप्लीकेशन सबमिट कर सकते हैं। हर एप्लीकेशन के लिए एक यूनिक ट्रैकिंग आईडी बनेगी और उसे वेरिफिकेशन के लिए संबंधित पटवारी या रेवेन्यू अधिकारी के पास इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा जाएगा। एप्लीकेशन मंज़ूर होने और तय फीस ऑनलाइन जमा करने के बाद डिजिटल रूप से सर्टिफाइड डॉक्यूमेंट अपने आप बन जाएगा और आवेदक के डैशबोर्ड से डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाएगा।

म्यूटेशन, रजिस्टर्ड सेल डीड और फर्द बदर की सर्टिफाइड कॉपी के लिए 100 रुपये की एक जैसी फीस लगेगी, चाहे डॉक्यूमेंट कितना भी बड़ा हो। जमाबंदी के लिए, पहले 10 पेज तक 100 रुपये की फीस लगेगी, जबकि उसके बाद हर पेज के लिए 5 रुपये अतिरिक्त फीस लगेगी। तय फीस ऑनलाइन जमा की जा सकती है, जिसके बाद डिजिटल रूप से सर्टिफाइड डॉक्यूमेंट आवेदक के डैशबोर्ड से डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाएगा।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि इस पहल से तहसील ऑफिस के बार-बार चक्कर लगाने की ज़रूरत काफी कम होने ज़मीन के रिकॉर्ड हासिल करने में देरी कम होने और एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ़्लो के ज़रिए पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। यह ऑनलाइन सिस्टम हर एप्लीकेशन और मंज़ूरी का पूरा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखकर जवाबदेही भी मज़बूत करेगा। डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए अपलोड किए गए रिकॉर्ड्स के सही होने की ज़िम्मेदारी संबंधित पटवारी या राजस्व अधिकारी की तय की गई है। अपलोड करने के बाद किसी भी सुधार की प्रक्रिया केवल तय आधिकारिक प्रक्रिया के ज़रिए ही की जाएगी।

वित्त आयुक्त ने कहा कि यह पहल राज्य की राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने और टेक्नोलॉजी-आधारित, नागरिक-अनुकूल प्लेटफॉर्म के ज़रिए सरकारी सेवाएँ पहुँचाने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है, जिससे ज़मीन के रिकॉर्ड तक पहुँच तेज़, ज़्यादा पारदर्शी और परेशानी-मुक्त हो सकेगी।

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