1857 की क्रांति की गाथा अब दुनिया देखेगी: 5 नवंबर को अमित शाह करेंगे अंबाला के शहीद स्मारक का उद्घाटन, पर्यटन मानचित्र पर उभरेगी छावनी

Date:

Share post:

अनिल विज बोले- आजादी की पहली लड़ाई का बिगुल अंबाला में मेरठ से नौ घंटे पहले बजा था; करीब 800 करोड़ रुपये से तैयार एशिया के सबसे बड़े स्मारकों में शामिल परिसर में होंगी 22 गैलरियां

हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा है कि अंबाला की ऐतिहासिक धरती को 1857 की आजादी की पहली लड़ाई के साथ जो सम्मान मिलना चाहिए था, अब उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास पूरा होने जा रहा है। अंबाला छावनी में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित भव्य शहीद स्मारक का उद्घाटन 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। विज के अनुसार, यह स्मारक न केवल स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों की शहादत को सामने लाएगा, बल्कि अंबाला को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

रविवार को बीपीएस प्लेनेटोरियम, अंबाला छावनी में उद्घाटन समारोह की तैयारियों को लेकर आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए विज ने कहा कि 10 मई 1857 को मेरठ में विद्रोह शुरू होने से लगभग नौ घंटे पहले अंबाला में 5वीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री के भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजा दिया था। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक तथ्य पर अंबाला और पूरे प्रदेश को गर्व होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान लोगों को शहीद स्मारक पर तैयार की गई पांच मिनट की लघु फिल्म भी दिखाई गई। विज ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे 5 नवंबर को गांधी ग्राउंड में होने वाले उद्घाटन समारोह में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें।

### अमित शाह ने स्मारक की सराहना की: विज

अनिल विज ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें स्मारक की पूरी जानकारी दी और इसके निर्माण तथा वहां विकसित की गई सुविधाओं से अवगत कराया। उनके अनुसार, अमित शाह ने स्मारक के स्वरूप और प्रयास की सराहना की है।

विज ने बताया कि उद्घाटन के दिन अमित शाह के हेलीकॉप्टर से स्मारक परिसर पहुंचने की संभावना है। इसके लिए परिसर में हेलीपैड भी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करने वाला राष्ट्रीय स्तर का परिसर है। इसके निर्माण के लिए देश के प्रतिष्ठित इतिहासकारों की एक समिति भी गठित की गई थी, ताकि ऐतिहासिक तथ्यों और घटनाओं को व्यवस्थित ढंग से प्रदर्शित किया जा सके।

### तीन दशक की मांग के बाद साकार हुआ शहीदों को सम्मान देने का सपना

विज ने कहा कि अंबाला छावनी में 1857 के शहीदों की स्मृति में स्मारक बनाने की मांग वह करीब 30 वर्षों से उठाते रहे हैं। उनका कहना था कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अक्सर 1885 में कांग्रेस की स्थापना और उसके बाद के आंदोलनों पर अधिक चर्चा हुई, जबकि उससे 28 वर्ष पहले 1857 में देशभर में अंग्रेजी शासन के खिलाफ व्यापक सशस्त्र विद्रोह हुआ था।

उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में हजारों भारतीयों को क्रूरतापूर्वक मौत के घाट उतारा गया। कई लोगों को पेड़ों से बांधकर गोली मारी गई और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई। इसके बावजूद लंबे समय तक इन शहीदों को वह स्थान नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार थे।

विज ने बताया कि 1857 के विद्रोह से जुड़े दस्तावेजों और ऐतिहासिक अभिलेखों को जुटाने के लिए भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अन्य देशों में उपलब्ध रिकॉर्ड का भी अध्ययन किया गया। उन्होंने अगस्त 1857 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों की गोलीबारी में महज दस मिनट के भीतर 135 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। उनके अनुसार, स्मारक में ऐसे अनेक प्रसंगों और शहादतों का दस्तावेजी विवरण प्रस्तुत किया गया है।

उन्होंने कहा कि आजादी के लिए जिसने भी अपने घर से एक कदम बाहर निकाला, वह सम्मान का अधिकारी है। जिन लोगों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन न्योछावर किया, उन्हें भुला देना इतिहास के साथ अन्याय होगा।

### 22 गैलरियों में दिखाई देगी 1857 के संघर्ष की पूरी तस्वीर

मंत्री के अनुसार, करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस शहीद स्मारक में 22 गैलरियां बनाई गई हैं। पूरे परिसर को देखने और सभी गैलरियों का अवलोकन करने में लगभग छह घंटे लग सकते हैं। इनमें 1857 के विद्रोह और देश के विभिन्न हिस्सों में हुए संघर्षों को विस्तार से प्रदर्शित किया गया है।

एक विशेष गैलरी उन शहीदों को समर्पित है जिनके नाम और योगदान आम तौर पर इतिहास की मुख्यधारा में पर्याप्त स्थान नहीं पा सके। विज ने बताया कि इस गैलरी में श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा, ताकि शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त करने वालों का विवरण सुरक्षित रखा जा सके।

उन्होंने कहा कि स्मारक में लगाया गया 63 मीटर ऊंचा कमल का प्रतीक भी 1857 के विद्रोह से जुड़ी ऐतिहासिक परंपरा को दर्शाता है। उस दौर में विद्रोही सैनिकों के बीच गुप्त संदेश पहुंचाने के लिए कमल का फूल और रोटी इस्तेमाल किए जाते थे। एक सैन्य टुकड़ी से दूसरी टुकड़ी तक ये प्रतीक पहुंचने का अर्थ था कि संबंधित सैनिक विद्रोह के लिए तैयार हैं।

### 26 मार्च से शुरू हुई थीं अंग्रेजों की इमारतों को आग लगाने की घटनाएं

विज ने 1857 के संघर्ष की शुरुआत से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि 26 मार्च से भारतीयों ने अंग्रेजों की कोठियों और प्रतिष्ठानों को आग लगाना शुरू कर दिया था। उनके अनुसार, इन घटनाओं की तारीखों और स्थानों का रिकॉर्ड उपलब्ध है।

उन्होंने 10 मई 1857 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन रविवार था। उनके दावे के मुताबिक, अंग्रेज अधिकारी चर्च में एकत्रित थे और भारतीय सैनिकों ने उन्हें घेरकर विद्रोह की योजना को आगे बढ़ाया।

विज ने बताया कि विद्रोह के बाद अंग्रेजी शासन ने भारतीय सैनिकों की कई सैन्य इकाइयों को भंग कर दिया था। उस समय अंग्रेजों की 74 कंपनियों में से अधिकांश को डिस्बैंड किया गया। अंबाला की 5वीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री तथा चौथी कैवेलरी भी उन इकाइयों में शामिल थीं जिन्हें समाप्त किया गया।

### स्काई कैफे, लाइट एंड साउंड शो और 2,500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर

शहीद स्मारक को इतिहास के साथ-साथ आधुनिक पर्यटन और मनोरंजन सुविधाओं से भी जोड़ा गया है। विज ने बताया कि यहां लाइट, लेजर और साउंड शो के माध्यम से 1857 के संघर्ष की कहानी दिखाई जाएगी। परिसर में 2,500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर, फूड कोर्ट और वॉटर बॉडीज विकसित की गई हैं।

मंत्री के अनुसार, शाम के समय मेमोरियल टावर और फव्वारों पर फिल्म प्रदर्शन की विशेष व्यवस्था होगी। उन्होंने इसे देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग बताया। टावर में दो हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई गई हैं, जिनकी मदद से पर्यटक ऊपरी हिस्से तक पहुंच सकेंगे और दूरबीन के माध्यम से अंबाला शहर तथा आसपास के क्षेत्रों का नजारा देख पाएंगे।

टावर की सबसे ऊपरी मंजिल पर स्काई कैफे बनाया गया है, जिसे परिसर का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। इसके अलावा स्मारक से जुड़ी यादगार वस्तुओं और अन्य सामग्री की बिक्री के लिए छोटी दुकानें भी स्थापित की जाएंगी।

### अंबाला छावनी को पर्यटन हब बनाने की योजना

विज ने कहा कि किसी भी शहर की आर्थिक गतिविधियां तब बढ़ती हैं जब वहां दूसरे शहरों और राज्यों से लोग पहुंचते हैं। शहीद स्मारक के खुलने के बाद अंबाला छावनी में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। इससे होटल, परिवहन, खानपान, बाजार और अन्य स्थानीय कारोबारों को लाभ मिल सकता है।

उन्होंने अंबाला में चंडीगढ़ की तर्ज पर पर्यटन बस सेवा शुरू करने की इच्छा भी जताई। प्रस्तावित बस के माध्यम से पर्यटकों को पहले शहीद स्मारक, फिर साइंस सेंटर, बैंक स्क्वेयर और सुभाष पार्क का भ्रमण कराया जा सकता है। इसके बाद पर्यटकों को सदर बाजार में खरीदारी का अवसर देने की योजना है।

विज के अनुसार, इस तरह अंबाला के ऐतिहासिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक स्थलों को एक ही पर्यटन मार्ग से जोड़ा जा सकेगा। इससे शहर की पहचान और स्थानीय व्यापार दोनों को मजबूती मिलने की संभावना है।

### स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को निशुल्क भ्रमण

मंत्री ने बताया कि हरियाणा के स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों को शहीद स्मारक का निशुल्क भ्रमण कराया जाएगा। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, उसके नायकों और बलिदानों से परिचित कराना है।

उन्होंने कहा कि इतिहास की उन घटनाओं और शहीदों को भी विद्यार्थियों तक पहुंचाना जरूरी है, जिन्हें पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया। स्मारक के माध्यम से युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता संघर्ष का व्यापक और दस्तावेजों पर आधारित परिचय देने का प्रयास किया गया है।

कार्यक्रम में नगर परिषद अध्यक्ष स्वर्ण कौर, उपाध्यक्ष ललता प्रसाद सहित भाजपा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। 5 नवंबर को होने वाले उद्घाटन समारोह को लेकर अंबाला छावनी में तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_img

Related articles

हरियाणा की बेटियों ने बदली प्रदेश की पहचान, राष्ट्रपति मुर्मु ने महिला सशक्तीकरण की उपलब्धियों को सराहा; जन्म के समय लिंगानुपात 871 से बढ़कर...

कुरुक्षेत्र में हीरक जयंती समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने कहा- पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत भागीदारी और...

President Murmu Hails Haryana’s Six-Decade Journey, Says State Has Made Outstanding Contributions to Nation-Building

At Diamond Jubilee celebrations in Kurukshetra, President highlights Haryana’s freedom fighters, women achievers, sporting excellence, agricultural strength and...

The IAS Officer Who Refused to Wait for Government Funds: Armstrong Pame Mobilised ₹40 Lakh to Build Manipur’s 100-Km ‘People’s Road’

A 2009-batch civil servant transformed a remote region’s connectivity by bringing together public donations, local volunteers and community...

Chandigarh Police Receives Prestigious President’s Colours on Diamond Jubilee, Honouring Six Decades of Service

Rare institutional distinction recognises generations of personnel for courage, professionalism and commitment to public safety; honour marks a...