हरियाणा सरकार ने अवैध हथियार निर्माण पर सख्ती से कार्रवाई करने के लिए एसओपी जारी की – डॉ. सुमिता मिश्रा

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हरियाणा के गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने हथियार और गोला-बारूद के निर्माण में लगे सभी लाइसेंस प्राप्त और गैर-लाइसेंस प्राप्त कारखानों/इकाइयों के निरीक्षण और नियमितीकरण के लिए एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। यह एसओपी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में तैयार की गई है।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि एसओपी का प्राथमिक उद्देश्य, शस्त्र अधिनियम, 1959 (शस्त्र संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित) और शस्त्र नियम, 2016 (2022 में संशोधित) के प्रवर्तन को उसकी वास्तविक भावना में और जमीनी स्तर लागू करना है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बिना लाइसेंस वाली बन्दूकों का अनियंत्रित प्रसार जन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा है और इसके लिए सख्त नियामक प्रक्रिया की आवश्यकता है। इस एसओपी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हथियारों का निर्माण केवल अधिकृत संस्थाओं द्वारा तथा कानून के दायरे में ही किया जाए।

इस पहल को क्रियान्वित करने के लिए, एसओपी में प्रत्येक जिले में एक जिला-स्तरीय शस्त्र नियंत्रण समिति के गठन का प्रावधान है। इस समिति की अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट करेंगे और इसमें पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय), जिला अटॉर्नी और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित बैलिस्टिक क्षेत्र का एक विशेषज्ञ सदस्य शामिल होगा। डॉ. मिश्रा ने बताया कि ये समितियाँ अगले दो महीनों के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र में सभी मौजूदा हथियार और गोला-बारूद निर्माण कारखानों/इकाइयों, चाहे वे लाइसेंस प्राप्त हों या गैर-लाइसेंस प्राप्त, का निरीक्षण करेंगी। इसके बाद, निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित मासिक निरीक्षण किए जाएँगे।

एसओपी के अनुसार यह अनिवार्य किया गया है कि लाइसेंस प्राप्त इकाइयों के निरीक्षण में लाइसेंस का सत्यापन, परिसर, मशीनरी, कच्चे माल, उत्पादन रिकॉर्ड और तैयार माल की गहन जाँच करना शामिल है। लाइसेंस की शर्तों का कोई भी उल्लंघना होने पर , जिसमें बन्दूकों या उनके पुर्जों का अनधिकृत निर्माण शामिल है, को तत्काल ज़ब्त किया जाएगा और उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। समितियों से इन कारखानों/इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने की भी अपेक्षा की जाती है।

बिना लाइसेंस वाली फैक्ट्रियों या इकाइयों के लिए, एसओपी में तत्काल कार्रवाई का प्रावधान है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि ऐसी सुविधाओं की स्थापना या संचालन में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समितियों को इन मामलों को ‘‘चिन्हित अपराध’’ के अंतर्गत वर्गीकृत करने की अनुशंसा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, बिना लाइसेंस वाले विनिर्माण केंद्रों की पहचान करके उन्हें नष्ट किया जाएगा और अवैध बन्दूकों के अनधिकृत निर्माण को रोकने के सरकारी प्रयासों में नागरिक समाज की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।

डॉ मिश्रा ने बताया कि एसओपी के कार्यान्वयन में पुलिस प्राधिकारी केंद्रीय भूमिका निभाएंगे। प्रत्येक जिले के पुलिस अधीक्षक या डीसीपी शस्त्र अधिनियम के मामलों को संभालने के लिए विशेषज्ञ जांचकर्ताओं का एक समर्पित प्रकोष्ठ बनाने के लिए जिम्मेदार होंगे। तस्करी के नेटवर्क और मार्गों पर नज़र रखने के लिए खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और राजमार्गों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। जांच अधिकारियों को पूरी तरह से दस्तावेजीकरण समय पर एफआईआर दर्ज करना और जब्त हथियारों को निचली अदालतों में उचित तरीके से पेश करना सुनिश्चित करना होगा।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए ज़िला अटॉर्नी को शस्त्र अधिनियम के तहत त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने और दोषसिद्धि व बरी होने पर मासिक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक ज़िले में वरिष्ठतम उप-ज़िला अटॉर्नी, शस्त्र अधिनियम, 1959 के तहत दर्ज मामलों में दायर आरोप-पत्रों की उचित जाँच सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेगा।

निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए ज़िला-स्तरीय शस्त्र नियंत्रण समितियों को अपने निरीक्षणों की विस्तृत रिपोर्ट राज्य-स्तरीय समिति को प्रस्तुत करनी होगी। पहली व्यापक निरीक्षण रिपोर्ट तीन महीने के भीतर और उसके बाद मासिक रिपोर्ट प्रत्येक माह की 7 तारीख तक जमा करनी होगी।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि ज़िला मजिस्ट्रेट शस्त्र अधिनियम, 1959 और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रभावी प्रवर्तन के लिए आवश्यक कोई भी अतिरिक्त निर्देश जारी करने के लिए अधिकृत हैं। उन्होंने दोहराते हुए कहा कि हरियाणा सरकार अवैध हथियारों के निर्माण को जड़ से उखाड़ फेंकने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि जन सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से कभी भी समझौता नहीं किया जाएगा।

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