मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आबकारी एवं कराधान विभाग की 6 ऑनलाइन सेवाओं का किया शुभारंभ

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हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आज आबकारी एवं कराधान विभाग की दो प्रमुख डिजिटल पहलों की शुरुआत करते हुए शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, दक्षता और सुगमता को नई गति प्रदान की। इन डिजिटल पहलों का उद्देश्य विभागीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह तकनीक-आधारित बनाना, सेवाओं को समयबद्ध तरीके से आमजन तक पहुंचाना और राजस्व प्रबंधन को अधिक सुदृढ़ करना है।

मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा विकसित “कर हितैषी” मोबाइल एप्लिकेशन का लोकार्पण किया। यह ऐप आम नागरिकों को जीएसटी चोरी की जानकारी सरल और गोपनीय तरीके से देने की सुविधा प्रदान करता है। नागरिक फर्जी बिलिंग, गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट, बिना पंजीकरण कारोबार, बिल न देने, या लेन-देन छिपाने जैसी अनियमितताओं की सूचना फोटो, वीडियो या दस्तावेज़ों के साथ अपलोड कर सकते हैं। ऐप यह सुनिश्चित करता है कि सूचना देने वाले की पहचान संबंधित फील्ड अधिकारियों को न दिखाई दे। प्राप्त सूचना पर विभागीय अधिकारी आवश्यक जांच व कार्रवाई करेंगे।

मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे स्वैच्छिक रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिलेगा और जीएसटी प्रशासन में पारदर्शिता मजबूत होगी।

इसके अलावा, श्री नायब सिंह सैनी ने छः नई ऑनलाइन आबकारी सेवाओं का शुभारंभ किया। ये सेवाएँ एथेनॉल, अतिरिक्त अल्कोहल (ईएनए) और डिनेचर्ड स्प्रिट से संबंधित अनुमतियों के लिए विकसित की गई हैं। अब व्यापारिक इकाइयाँ एथेनॉल और ईएनए के आयात निर्यात तथा डिनेचर्ड स्प्रिट के निर्यात आयात की अनुमति ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगी। इस प्रणाली में आवेदक आवेदन की स्थिति देख सकते हैं और डिजिटल हस्ताक्षरित अनुमति पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।

बैठक में बताया गया कि वास्तविक समय में डैशबोर्ड के माध्यम से माल की आवाजाही, अनुमतियों की समय-सीमा और अनुपालन की निगरानी की जा सकेगी। यह व्यवस्था कागजी कार्यवाही कम करेगी, दुरुपयोग की संभावनाएं रोकेंगी और उद्योगों को तेज व पारदर्शी सेवाएँ प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अन्य आबकारी सेवाओं जैसे ब्रांड लेबल पंजीकरण और लाइसेंसिंग मॉड्यूल को भी शीघ्र ऑनलाइन किया जाए, ताकि विभागीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह तकनीक-आधारित बनाया जा सकेगा।

चालू वित्त वर्ष में नवंबर तक कुल जीएसटी संग्रह 83,606 करोड़जो पिछले वर्ष की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक

मुख्यमंत्री ने आबकारी एवं कराधान विभाग की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की। बैठक में विभाग के राजस्व प्रदर्शन, प्रवर्तन कार्रवाइयों, लंबित वसूली, तथा जीएसटी, वैट और आबकारी क्षेत्र में चल रहे डिजिटल सुधारों की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।

बैठक में जानकारी दी गई कि हरियाणा ने पूरे देश में नेट एसजीएसटी संग्रह में सर्वाधिक 21 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की है, जबकि राष्ट्रीय औसत 6 प्रतिशत है। नवंबर 2025 में राज्य का नेट एसजीएसटी संग्रह 3,835 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष नवंबर के मुकाबले 17 प्रतिशत अधिक है। चालू वित्त वर्ष में नवंबर तक कुल जीएसटी संग्रह 83,606 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है और राष्ट्रीय औसत 5.8 प्रतिशत से बेहतर है। बढ़ते राजस्व के आधार पर हरियाणा की रैंकिंग भी सुधारकर चौथे स्थान पर पहुंच गई है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में 6,03,389 जीएसटी पंजीकृत करदाता हैं, जिनमें 2018 से 2025 के बीच 6.11 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई है।

बैठक में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने मूल्य वर्धित कर (वैट) और सीएसटी की भी समीक्षा की। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि हरियाणा में वैट छः वस्तुओं पेट्रोल, डीजल, शराब, पीएजी, सीएनजी एवं सीएसटी वस्तुओं पर लागू होता है। वर्ष 2025-26 में नवंबर तक वैट वसूली में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसमें वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) स्कीम-2025 का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस योजना के कारण सीएसटी संग्रह में 60.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। योजना के 27 सितंबर 2025 को समाप्त होने के बाद विभाग ने विशेष वसूली अभियान चलाया, जिसके तहत अक्तूबर-नवंबर 2025 में 48.12 करोड़ रुपये की वसूली की गई।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने वैट मॉनिटरिंग डैशबोर्ड भी विकसित किया है, जो वास्तविक समय में वैट जमा की निगरानी करता है। साथ ही, देरी होने पर स्वतः संकेत देता है और फील्ड अधिकारियों को समय पर कार्रवाई करने में सहायता करता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी जिले इस डैशबोर्ड का नियमित उपयोग सुनिश्चित करें, ताकि विभाग की कार्यप्रणाली में और दक्षता सुनिश्चित हो सके।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 में 30 नवंबर 2025 तक आबकारी राजस्व 9,370.28 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 8,629.46 करोड़ रुपये संग्रहित हुए थे। विभाग ने जिलावार और मदवार लाइसेंस शुल्क, आबकारी शुल्क, बॉटलिंग शुल्क, परमिट शुल्क, आयात शुल्क एवं देशी शराब पर वैट का विवरण प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कम संग्रह वाले जिलों को निगरानी बढ़ाने, निरीक्षण तेज करने और समयबद्ध सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

इसके अलावा, 125 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की, वर्तमान नीति वर्ष में 46.66 करोड़ रुपये की वसूली और देरी से जमा लाइसेंस शुल्क पर ब्याज की स्वचालित गणना प्रणाली के माध्यम से 16.46 करोड़ रुपये की अनिवार्य वसूली की गई है। विभाग ने QR-आधारित ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली, होलोग्राम प्रमाणीकरण, मैन्युफैक्चरिंग यूनिटों पर एएनपीआर कैमरे और बूम बैरियर, डिस्टिलरी में टेलीमेट्री आधारित वास्तविक समय मॉनिटरिंग तथा ऑनलाइन लाइसेंसिंग मॉड्यूल पर भी प्रगति की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन डिजिटल सुधारों को तेज गति से लागू किया जाए और इनके प्रभाव की नियमित समीक्षा की जाए ताकि पारदर्शिता, अनुपालन और सेवा-प्रदर्शन में स्पष्ट सुधार दिखाई दे। मुख्यमंत्री ने विभाग के राजस्व प्रदर्शन और डिजिटल सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार एक पारदर्शी, तकनीक संचालित और नागरिक-हितैषी कर एवं आबकारी प्रशासन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, आबकारी एवं कराधान विभाग की आयुक्त एवं सचिव श्रीमती आशिमा बराड़, आबकारी एवं कराधान आयुक्त श्री विनय प्रताप सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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