कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और बिगड़ता जनजीवन: उत्तर भारत सर्दी की दोहरी मार से जूझ रहा

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उत्तर भारत में सर्दी ने अब अपना असली और कठोर रूप दिखाना शुरू कर दिया है। हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों से लेकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों तक ठंड, घना कोहरा और गिरते तापमान ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सुबह और देर रात के समय हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई इलाकों में दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात पर सीधा असर पड़ रहा है।

भारतीय मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, यह स्थिति फिलहाल अस्थायी नहीं है। पश्चिमी विक्षोभों की लगातार सक्रियता के कारण आने वाले कम से कम दो सप्ताह तक उत्तर भारत को ठंड, कोहरे, शीतलहर और पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश व बर्फबारी का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर हिमालयी राज्यों और उनसे सटे मैदानी इलाकों में मौसम की तल्खी और बढ़ने की आशंका जताई गई है।

दिल्ली-एनसीआर की बात करें तो यहां लोगों को मौसम की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर घना कोहरा सुबह की रफ्तार पर ब्रेक लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर वायु प्रदूषण सांस लेना मुश्किल बना रहा है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए खतरा बढ़ गया है। सुबह-सुबह सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं और ट्रेनों व उड़ानों में घंटों की देरी आम हो गई है।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में ठंड का असर और भी ज्यादा तीखा नजर आ रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान शून्य के करीब पहुंच गया है और कई स्थानों पर बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण आने वाले दिनों में बारिश और बर्फबारी से ठंड और बढ़ सकती है। इससे जहां एक ओर पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें भी बढ़ेंगी।

पंजाब और हरियाणा में भी हालात सामान्य नहीं हैं। घना से बेहद घना कोहरा इन राज्यों में सड़क हादसों का खतरा बढ़ा रहा है। खेतों में काम करने वाले किसान, सुबह स्कूल जाने वाले बच्चे और दफ्तर जाने वाले कर्मचारी सभी ठंड और कोहरे से परेशान नजर आ रहे हैं। शीत दिवस जैसी स्थिति बनने से दिन के तापमान में भी खास बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है, जिससे ठंड पूरे दिन असर दिखा रही है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जम्मू क्षेत्र से लेकर पश्चिमी हिमालय तक निचले और मध्य क्षोभमंडल में एक से अधिक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हैं। इसके साथ ही वेस्टर्न जेट स्ट्रीम की तेजी ने ठंडी हवाओं की रफ्तार बढ़ा दी है। इन सभी मौसमी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से उत्तर भारत में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। 24 दिसंबर के आसपास एक नया चरण शुरू हो सकता है, जिसके बाद 25 से 31 दिसंबर के बीच फिर से बारिश, बर्फबारी और कोहरे की स्थिति बनने की संभावना है।

मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री तक नीचे जा सकता है। हालांकि अभी किसी व्यापक और लंबी शीतलहर की चेतावनी नहीं दी गई है, लेकिन सुबह और रात के समय ठंड और कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ाएगा। खासतौर पर दिहाड़ी मजदूर, बेघर लोग और खुले में काम करने वाले वर्ग के लिए यह मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में अतिरिक्त सावधानी बेहद जरूरी है। ठंड से बचाव, प्रदूषण से सुरक्षा और कोहरे में यात्रा के दौरान सतर्कता ही जोखिम को कम कर सकती है। मौसम विभाग ने भी लोगों को सलाह दी है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, वाहन चलाते समय फॉग लाइट का इस्तेमाल करें और ठंड से बचने के पर्याप्त इंतजाम रखें।

कुल मिलाकर, उत्तर भारत इस समय सर्दी के सबसे कठिन दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले दिनों में मौसम और सख्त हो सकता है, ऐसे में प्रशासन और आम जनता—दोनों के लिए सतर्कता और तैयारी बेहद जरूरी है। ठंड, कोहरा और प्रदूषण की यह त्रिवेणी फिलहाल राहत देने के मूड में नजर नहीं आ रही है।

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