दिल्ली-एनसीआर। ट्रैफिक जाम, घंटों की यात्रा और रोज़मर्रा की थकान से जूझ रहे दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। आने वाले समय में गुरुग्राम से दिल्ली, कनॉट प्लेस से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए न कार की जरूरत होगी और न ही मेट्रो की भीड़ झेलनी पड़ेगी। अब यह सफर होगा सीधे आसमान के रास्ते—और वह भी महज़ कुछ ही मिनटों में। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की ताज़ा रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर में ‘एयर टैक्सी’ सेवा शुरू करने का विस्तृत रोडमैप सामने आया है, जिसे शहरी परिवहन के भविष्य की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
सीआईआई की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी यानी eVTOL (Electric Vertical Take-Off and Landing) के जरिए गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को हवाई कॉरिडोर से जोड़ा जा सकता है। इन टैक्सियों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि ये हेलिकॉप्टर की तरह सीधा ऊपर उड़ान भरेंगी और सीधे नीचे उतर सकेंगी, लेकिन बिना शोर और बिना प्रदूषण के, क्योंकि ये पूरी तरह बिजली से संचालित होंगी। यह न सिर्फ समय की बचत करेगा, बल्कि पर्यावरण के लिहाज़ से भी शहरी परिवहन को नई दिशा देगा।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एयर टैक्सी से गुरुग्राम से कनॉट प्लेस का सफर केवल 7 से 10 मिनट में पूरा हो सकेगा। आज यही दूरी सड़क या मेट्रो से तय करने में डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते हैं। प्रस्तावित योजना के तहत लगभग 65 से 75 किलोमीटर लंबा एक विशेष हवाई कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जहां इन टैक्सियों की आवाजाही नियंत्रित और सुरक्षित ढंग से की जा सकेगी। यह कॉरिडोर भविष्य में दिल्ली-एनसीआर की जीवनशैली और कामकाज की गति को पूरी तरह बदल सकता है।
एयर टैक्सी दिखेंगी कैसी—यह सवाल लोगों के मन में सबसे पहले आता है। ये छोटे आकार की इलेक्ट्रिक हवाई गाड़ियां होंगी, जिनका डिज़ाइन आधुनिक और कॉम्पैक्ट होगा। इनमें आमतौर पर 2 से 5 यात्रियों के बैठने की क्षमता हो सकती है। न धुआं, न तेज़ शोर और न ही रनवे की जरूरत—यही इन्हें पारंपरिक विमानों और हेलिकॉप्टरों से अलग बनाता है। इन्हें उतारने और चढ़ाने के लिए इमारतों की छतों पर विशेष लैंडिंग पैड बनाए जाएंगे, जिन्हें ‘वर्टीपोर्ट’ कहा जाएगा। ऑफिस कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, एयरपोर्ट और बड़े व्यावसायिक केंद्रों की छतें इसके लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं, जिससे ज़मीन पर अतिरिक्त जगह घेरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ज़मीन पर उतारने के लिए सीआईआई के साथ कई अग्रणी स्टार्टअप और कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें The ePlane Company, Sarla Aviation और Hunch Mobility जैसी कंपनियां शामिल हैं। शुरुआती चरण में इस सेवा को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने की योजना है, जिसमें मेडिकल इमरजेंसी, अंग प्रत्यारोपण के लिए ऑर्गन ट्रांसपोर्ट, दवाइयों की तेज़ डिलीवरी जैसे कार्य शामिल होंगे। इसके सफल होने के बाद आम नागरिकों के लिए यात्री सेवा शुरू की जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला तो अगले एक साल में सीमित स्तर पर एयर टैक्सी सेवा शुरू हो सकती है, जबकि यात्रियों के लिए टेस्ट फ्लाइट्स 2 से 3 वर्षों के भीतर संभव हैं। अनुमान है कि 2026 से 2028 के बीच दिल्ली-एनसीआर में यह सेवा प्रयोगात्मक रूप से शुरू हो सकती है, जो आगे चलकर पूर्ण व्यावसायिक मॉडल में तब्दील होगी।
हालांकि यह सपना जितना रोमांचक है, उतनी ही चुनौतियां भी इसके साथ जुड़ी हैं। दिल्ली का हवाई क्षेत्र पहले से ही बेहद व्यस्त है, ऐसे में एयर टैक्सी के लिए अलग नियम, सख्त सुरक्षा मानक और विशेष एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करना होगा। इसके अलावा, वर्टीपोर्ट निर्माण, तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार व विमानन नियामक एजेंसियों की मंजूरी भी अनिवार्य होगी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल हुआ तो यह न केवल ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाएगा, बल्कि शहरी परिवहन की परिभाषा ही बदल देगा।
कुल मिलाकर, एयर टैक्सी सिर्फ एक नई सुविधा नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के लिए जीवनशैली बदलने वाला कदम साबित हो सकती है। जिस शहर में समय सबसे कीमती है, वहां मिनटों में होने वाला यह आसमानी सफर आने वाले वर्षों में लोगों की सोच, काम और आवागमन—तीनों को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है।

