पश्चिम एशिया तनाव का असर हरियाणा तक: अंबाला में कमर्शियल गैस सिलेंडर सप्लाई बाधित, होटल-रेस्तरां कारोबारियों की चिंता बढ़ी

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अंबाला/चंडीगढ़: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के कई हिस्सों में महसूस किया जाने लगा है और उत्तर भारत के राज्यों में भी इसके संकेत दिखाई दे रहे हैं। हरियाणा के अंबाला सहित कुछ अन्य शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने की खबरों ने होटल, रेस्तरां और छोटे खाद्य व्यवसायों से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गैस एजेंसियों और स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति में व्यवधान देखने को मिल रहा है, जिसके कारण नए सिलेंडर समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

व्यापारियों के अनुसार, इस स्थिति का सीधा असर उन व्यवसायों पर पड़ रहा है जो रोजाना अपने संचालन के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर निर्भर रहते हैं। होटल, ढाबे, कैटरिंग सेवाएं और छोटे फूड स्टॉल जैसे कारोबार गैस की नियमित आपूर्ति के बिना सुचारु रूप से नहीं चल सकते। ऐसे में यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उत्तर भारत के कई शहरों में खाद्य सेवा उद्योग पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

अंबाला के कई रेस्तरां संचालकों ने बताया कि पिछले कुछ समय से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की उपलब्धता पहले ही सीमित थी और अब आपूर्ति में और कमी आने से स्थिति और जटिल हो गई है। स्थानीय गैस एजेंसियों का कहना है कि आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आने के कारण मांग के मुकाबले सिलेंडरों की संख्या कम पड़ रही है। यही वजह है कि कई व्यापारियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं।

स्थानीय रेस्तरां व्यवसाय से जुड़े गुरप्रीत सिंह ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ोतरी हो रही थी, जिससे पहले ही उनके कारोबार की लागत बढ़ गई थी। अब जब आपूर्ति में भी कमी आने लगी है तो स्थिति और गंभीर हो गई है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा व्यवसाय कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर निर्भर है और यदि नियमित आपूर्ति बाधित होती है तो होटल और रेस्तरां संचालन लगभग ठप हो सकता है।

उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति में कई कारोबारियों को अपनी दैनिक जरूरत के अनुसार सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यवसाय को पांच सिलेंडरों की आवश्यकता होती है तो गैस एजेंसियों से केवल दो सिलेंडर ही उपलब्ध हो पा रहे हैं। इससे खाना पकाने की व्यवस्था प्रभावित हो रही है और कई स्थानों पर कामकाज सीमित करना पड़ रहा है।

हरियाणा के अन्य शहरों में भी व्यवसायी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि राज्य सरकार या तेल विपणन कंपनियों की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक व्यापक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर आपूर्ति में असंतुलन की खबरें व्यापारिक समुदाय के बीच चिंता का विषय बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां लंबे समय तक तनावपूर्ण बनी रहती हैं तो ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।

ऊर्जा बाजार से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव अक्सर ऊर्जा क्षेत्र पर असर डालते हैं, खासकर तेल और गैस की कीमतों तथा आपूर्ति व्यवस्थाओं पर। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं, वहां अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का प्रभाव घरेलू बाजार में भी दिखाई दे सकता है।

उत्तर भारत के कई शहरों में होटल और रेस्तरां उद्योग पहले ही बढ़ती लागत, महंगे कच्चे माल और ऊर्जा कीमतों के दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में यदि गैस सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित होती है तो छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है।

व्यापारियों ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों से मांग की है कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि होटल और रेस्तरां उद्योग को किसी बड़े संकट का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि यह उद्योग हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करता है और इसकी आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से व्यापक आर्थिक असर पड़ सकता है।

फिलहाल हरियाणा और उत्तर भारत के कारोबारी इस स्थिति के जल्द सामान्य होने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि आने वाले दिनों में आपूर्ति की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के रुख पर काफी कुछ निर्भर करेगा। यदि गैस सिलेंडरों की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं होती है तो होटल, ढाबों और छोटे खाद्य व्यवसायों के लिए परिचालन लागत और चुनौतियां दोनों बढ़ सकती हैं।

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