CSR से हरियाणा की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव, एसीएस डॉ. सुमिता मिश्रा ने की रणनीतिक पहल

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हरियाणा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव,  डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य के सरकारी अस्पतालों को आधुनिक बनाने के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) साझेदारी का लाभ उठाने हेतु एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ-साथ 25 से अधिक कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों, जिनमें सार्वजनिक और निजी बैंक के अधिकारी भी शामिल हुए।

बैठक में राज्य के e-Upchaar सिस्टम के आंकड़ों के आधार पर चर्चा की गई, जिसमें बताया गया कि वर्ष 2025 में जिला अस्पतालों में 95.71 लाख ओपीडी (OPD) विजिट दर्ज की गईं। पंचकुला, गुरुग्राम, करनाल और फरीदाबाद के जिला अस्पतालों में विशेष रूप से मरीजों की संख्या अधिक देखी गई, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाती है। बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य में 3,402 स्वास्थ्य संस्थानों का मजबूत नेटवर्क है, जिसमें 74 जिला अस्पताल, 33 शहरी डिस्पेंसरी, 25 पॉलीक्लिनिक/अर्बन हेल्थ सेंटर और 3,270 अन्य स्वास्थ्य केंद्र (122 सीएचसी, 408 पीएचसी, 2,740 सब-सेंटर) शामिल हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या से यह स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, जांच सुविधाओं का विस्तार करने और अस्पतालों को आधुनिक तकनीक से लैस करने की तत्काल आवश्यकता है।

बैठक का मुख्य विषय यह रहा कि CSR के तहत  उपलब्ध कराए जा रहे मेडिकल उपकरण ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं । बैठक में यह भी बताया गया कि CSR हस्तक्षेप के माध्यम से अब सरकारी अस्पतालों में उन्नत जांच और उपचार सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं, जो पहले संभव नहीं थीं।

बैठक में बताया गया कि राज्य में लगभग 1,000 हीमोफीलिया मरीज हैं, जिनका इलाज प्रति मरीज प्रतिवर्ष 4–5 लाख रुपये तक का खर्च आता है। इस प्रकार कुल अनुमानित वार्षिक खर्च लगभग 50 करोड़ रुपये है, जिसे पूरा करने के लिए कॉर्पोरेट संस्थाओं को सहयोग के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। हाल ही में बीपीसीएल ने CSR के तहत लगभग 20.5 करोड़ रुपये की लागत से 150 ट्रूनैट क्वाट्रो मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक मशीनें प्रदान की हैं। इसके अलावा लगभग 5.29 करोड़ रुपये के बायोमेडिकल उपकरण भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें कलर डॉपलर, अल्ट्रासाउंड मशीन, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन और फ्लोर क्लीनिंग मशीन शामिल हैं। इसके अलावा,अब मरीजों को उच्च स्तरीय जांच सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध हो रही हैं, जिससे उनके निजी खर्च में कमी आई है और निजी अस्पतालों पर निर्भरता भी घटी है। साथ ही कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान से इलाज के बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं।

बैठक में CSR के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने वाले प्राथमिक उपकरणों की सूची की भी समीक्षा की गई, जिनमें डिजिटल मैमोग्राफी मशीन, DEXA मशीन, 4K इमेजिंग के साथ आर्थ्रोस्कोपी सिस्टम, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस, लैप्रोस्कोपी सर्जिकल सेट, अल्ट्रासाउंड कलर डॉपलर मशीन और ऑर्थोपेडिक सर्जिकल उपकरण शामिल हैं। इन आधुनिक तकनीकों के जिला स्तर पर उपलब्ध होने से सरकारी अस्पतालों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे जटिल मामलों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा और बड़े शहरों के तृतीयक स्वास्थ्य केंद्रों पर बोझ कम होगा।

 डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में 100 करोड़ रुपये के CSR फंड जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत किया जा सके। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में CSR को केवल एक वैधानिक दायित्व के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए, जिससे कंपनियों की साख बढ़ती है और समाज में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले बिना स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जा सकता है।

यह पहल स्वास्थ्य विभाग के उस व्यापक उद्देश्य के अनुरूप है, जिसके तहत प्रत्येक नागरिक को समान, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना सुनिश्चित किया जा रहा है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जांच सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से राज्य व्यक्तिगत स्वास्थ्य खर्च को कम करने, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार करने और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

हरियाणा द्वारा CSR को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ने का यह पारदर्शी और संरचित मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बनकर उभर रहा है। लगभग एक करोड़ मरीज प्रतिवर्ष इन सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि टिकाऊ और व्यापक समाधानों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

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