हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने राज्य की सभी गर्भवती महिलाओं से आह्वान किया कि वे हेपेटाइटिस-बी की जांच करवाएं। यदि जांच में वे पॉजिटिव पाई जाती हैं, तो उनकी डिलीवरी किसी ऐसे जिला अस्पताल में करवाई जानी चाहिए, जहाँ नवजात शिशु की सुरक्षा के लिए एचबीआईजी (HBIG) और हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन दोनों आसानी से उपलब्ध हों।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में हेपेटाइटिस-बी और सी के मामलों की रिपोर्टिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया गया है और पूरे राज्य में स्क्रीनिंग, जांच और इलाज मुफ़्त उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश में हेपेटाइटिस-बी और सी को अधिसूचित रोग घोषित किया हुआ है। इसके अनुसार, राज्य की सभी स्वास्थ्य सुविधाओं को हेपेटाइटिस-बी और सी के मामलों की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य है।
आरती सिंह राव ने जानकारी देते हुए कहा कि हेपेटाइटिस-बी और सी के मामलों की रिपोर्टिंग को सुव्यवस्थित करने के लिए, विशेष रूप से निजी स्वास्थ्य सुविधाओं द्वारा —एक समर्पित ऑनलाइन डैशबोर्ड/पोर्टल विकसित किया गया है। इस पोर्टल को पायलट आधार पर प्रथम चरण में पंचकूला, कैथल, नूंह, जींद, हिसार, रेवाड़ी समेत छह जिलों में लॉन्च किया गया है, और अगले माह जून, 2026 से पूरे प्रदेश में इसे लागू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस-बी और सी की स्क्रीनिंग, जांच और इलाज पूरे राज्य के सभी जिला अस्पतालों के साथ-साथ सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में भी मुफ़्त उपलब्ध है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हरियाणा के मिशन निदेशक डॉ. आर.एस. ढिल्लों ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि हेपेटाइटिस-बी एक “हेपेटाइटिस-बी सरफेस एंटीजन (HBsAg)” पॉजिटिव गर्भवती महिला से उसके नवजात शिशु में फैल सकता है। इस संक्रमण को जन्म के 24 घंटे के भीतर नवजात शिशु को हेपेटाइटिस-बी इम्यून ग्लोबुलिन (HBIG) और हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन टीके लगाकर प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। ये दोनों ही टीके राज्य सरकार की सभी स्वास्थ्य सुविधाओं पर मुफ़्त उपलब्ध हैं।

