मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 602 पंजीकृत गौशालाओं के लिए 68 करोड़ 34 लाख रुपये की अनुदान राशि की जारी

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हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने जिला सोनीपत के गांव भटगांव में आयोजित राज्य स्तरीय गौशाला चारा अनुदान राशि वितरण समारोह में प्रदेश की गौशालाओं के सशक्तिकरण के लिए 68 करोड़ 34 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि जारी की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को होली के पर्व की शुभकामनाएं भी दी।



मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गौ माता हमारी संस्कृति, आस्था और संवेदनशीलता की प्रतीक हैं। गौ सेवा केवल धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ विषय है। सरकार का उद्देश्य गौशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भटगांव की दोनों ग्राम पंचायतों तथा धर्मार्थ गौशाला भटगांव को 21-21 लाख रुपये देने की भी घोषणा की।



सोनीपत सहित प्रदेशभर की गौशालाओं को अनुदान राशि



मुख्यमंत्री ने बताया कि सोनीपत जिले की 27 पंजीकृत गौशालाओं के लिए 5 करोड़ 60 लाख रुपये की राशि जारी की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की 602 पंजीकृत गौशालाओं को यह अनुदान दिया जा रहा है, जिससे हजारों गौशालाओं में आश्रय ले रहे गोवंश को चारे की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित होगी।



उन्होंने जानकारी दी कि पिछले सवा 11 वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत गौशालाओं को 457 करोड़ 41 लाख रुपये की अनुदान राशि दी गई थी और आज की राशि मिलाकर यह आंकड़ा बढक़र 525 करोड़ 75 लाख रुपये से अधिक हो चुका है। यह सरकार की गौसंवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।



गौशालाओं की संख्या और क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि



मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 तक प्रदेश में केवल 215 पंजीकृत गौशालाएं थीं, जिनमें लगभग 1 लाख 75 हजार गोवंश का पालन-पोषण हो रहा था। वर्तमान में 697 पंजीकृत गौशालाएं कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 4 लाख बेसहारा गोवंश को आश्रय दिया जा रहा है। यह वृद्धि प्रदेश सरकार की योजनाओं और समाज के सहयोग से संभव हुई है।



सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर बनेगी गौशालाएं



मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 330 गौशालाओं में सोलर ऊर्जा प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं और वर्ष 2026-27 तक सभी पंजीकृत गौशालाओं को सौर ऊर्जा आधारित परिसरों में परिवर्तित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त गौशालाओं को 2 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है, जिससे उनके खर्च में कमी आएगी।



ई-रिक्शा और पंचगव्य आधारित उत्पादों को बढ़ावा



मुख्यमंत्री ने बताया कि गौशालाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया जारी है, जिससे गौशालाएं अपने उत्पादों की मार्केटिंग कर सकें और आय बढ़ा सकें। पंचगव्य आधारित उत्पादों—जैसे जैविक खाद, प्राकृतिक पेंट, दीया, धूपबत्ती, गोबर के गमले, गो अर्क आदि—के निर्माण हेतु आवश्यक मशीनरी के लिए 101 गौशालाओं को अनुदान दिया गया है।



उन्होंने कहा कि पंचगव्य आधारित उत्पादों के अनुसंधान और विकास के लिए पंचकूला स्थित हरियाणा गोवंश अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है, जो नवाचार और गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

गोवंश के स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार



मुख्यमंत्री ने कहा कि गौशालाओं में गौवंश के स्वास्थ्य की जांच के लिए नियमित पशु चिकित्सक ड्यूटी पर तैनात किए जा रहे हैं। तीन हजार से अधिक गौवंश वाली गौशालाओं में सप्ताह में एक दिन पशु चिकित्सक की ड्यूटी और छोटी गौशालाओं में वीएलडीए की सेवाएं सुनिश्चित की गई हैं। मोबाइल पशु चिकित्सालय की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है।



गौ-अभयारण्यों की स्थापना



प्रदेश को बेसहारा गौवंश से मुक्त करने के उद्देश्य से दो गौ-अभयारण्यों की स्थापना की गई है, जिनमें हजारों गोवंश को आश्रय देने की क्षमता है। इनके लिए करोड़ों रुपये की राशि जारी की जा चुकी है, जिससे इन गौ-अभयारण्यों में शेड, पानी और चारे की समुचित व्यवस्था की गई है।



देसी नस्लों का संरक्षण



मुख्यमंत्री ने कहा कि देसी नस्लों—हरियाणा, साहिवाल एवं बेलाही—के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना चलाई जा रही है। दूध उत्पादन क्षमता के अनुसार 5 हजार से 20 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के माध्यम से नस्ल सुधार और संरक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है।



सख्त कानून से गोवंश की सुरक्षा



मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हरियाणा गौ-वध संरक्षण एवं गौ संवर्धन अधिनियम-2015’ के माध्यम से गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इस कानून के तहत गोहत्या और अवैध तस्करी पर सख्त दंड का प्रावधान है। सरकार गोवंश की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।



समाज से सहयोग की अपील



मुख्यमंत्री ने पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय सहयोग करें। उन्होंने कहा कि गौशालाओं के संचालन में समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हरियाणा सरकार गौ सेवा, गौ संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत।

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