हरियाणा में लक्षित सुक्ष्म योजना और जन भागीदारी से मलेरिया के खिलाफ लड़ाई की तेज

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राज्य में पॉजिटिविटी रेट कम, मौत का आंकड़ा ज़ीरो; विश्व मलेरिया दिवस पर  निगरानी बढ़ाई

विश्व मलेरिया दिवस पर हरियाणा के स्वास्थय विभाग ने मलेरिया को खत्म करने में तेजी लाने के लिए कई नई लक्षित पहल शुरू की हैं, जिसमें गांव और मोहल्ला स्तर पर सुक्ष्म निगरानी स्त्रोत का पता लगाना और घनी जोखिम वाली आबादी की मॉनिटरिंग पर फोकस किया गया है। स्वास्थय और परिवार कल्याण विभग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि ये उपाय राज्य भर में ट्रांसमिशन को रोकने के लिए जल्दी पता लगाने और तुरंत जबरदस्त इलाज सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए गए हैं।

इस नई पहल के तहत स्वास्थय कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित की जाने वाली गतिविधियों़ के अलावा, पिछले साल मलेरिया के मामलों की रिपोर्ट करने वाले सभी गांवों और शहरी इलाकों को कवर करने के लिए एक सघन सुक्ष्म योजना तैयार की गई।ऐसे इलाकों में स्वास्थय टीमें हर महीने घर घर जाकर सर्वे कर रही हैं, जिसमें 950 से ज़्यादा दौरे पहले ही किए जा चुके हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी संभावित मामला छूट न जाए।

विभाग का यह एक और कदम है कि हर रिपोर्ट की जांच अवश्य की जाएगी। अब हर केस की जांच एक स्पेशल टीम करती है, जिसमें एक एपिडेमियोलॉजिस्ट भी शामिल है ताकि इन्फेक्शन की सही शुरुआत में ही पता लगाया जा सके तथा उस सोर्स को फैलने से रोका जा सके। इस वैज्ञानिक, डेटा-ड्रिवन तरीके से बीमारी की निगरानी और मज़बूत होने की उम्मीद है।

यह मानते हैं कि 75 प्रतिशत से ज़्यादा नए केस बाहर से आए मज़दूरों से जुड़े हुए हैं। विभाग द्वारा लेबर साइट्स का हर महीने हर महीने के पहले सोमवार को जांच शुरू की जाएगी। इस लक्षित बाहरी पहंुच का उद्वेश्य कमज़ोर समूह में इन्फेक्शन का जल्दी पता लगाना और फैलने का खतरा कम करना है।

इस साल की ग्लोबल थीम “मलेरिया खत्म करने के प्रयास अब हमें करने ही होंगे। हरियाणा ने मलेरिया को नियंत्रण करने में पहले ही काफी तरक्की कर ली है। वर्ष 2014 में 4,485 केसों में से तेज़ी से घटकर 2025 में सिर्फ़ 202 रह गए है, और हाल के सालों में मलेरिया से कोई मौत नहीं हुई है। वर्ष 2025 में दर्ज कुल 515 मामलों में से, सिर्फ़ 202 राज्य के अंदर के थे, जबकि बाकी दूसरे राज्यों से जुड़े हुए थे। खास बात यह है कि 31 मार्च, 2026 तक सिर्फ़ 8 मामले दर्ज हुए हैं, जो अब लगातार नियंत्रण में है।

राज्य के मजबूत निगरानी सिस्टम के तहत वर्ष 2025 में 36 लाख से ज़्यादा टेस्ट किए गए। वार्षिक रक्त जांच दर 12.37 प्रतिशत तक पहुँच गई, जो राट्रीय स्तर से ज़्यादा है, जबकि पॉज़िटिविटी रेट 0.014 प्रतिशत बहुत कम है। जो बेहतर रोकथाम के प्रयासों को दर्शाता है। हरियाणा में डायग्नोसिस के लिए फ़ील्ड सर्वे के दौरान आरडीटी को मुख्य टूल के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। जबकि संस्थान स्तर पर डायग्नोसिस के लिए माइक्रोस्कोपी को मुख्य आधार के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।

स्वास्थय विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे बुखार के मामलों की तुरंत जांच करवाएं और पूरा इलाज करवाने सहयोग करें। प्राइवेट डॉक्टरों से भी संक्रामक  रोग अधिनियम 1899 के तहत मलेरिया के मामलों को नोटिफ़ाई करें। इस पर बल दिया गया है कि बीमारी फैलने से रोकने के लिए समय पर रिपोर्टिंग बहुत ज़रूरी है। लगातार निगरानी जन भागीदारी के साथ, हरियाणा मलेरिया को पूरी तरह खत्म करने के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

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