हरियाणा विधानसभा सचिव पद पर पहली बार एचसीएस अधिकारी की नियुक्ति, विधायी नियमों को लेकर उठे सवाल

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चंडीगढ़, 21 जुलाई 2025 — हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में एक नई मिसाल कायम करते हुए राज्य सरकार ने पहली बार हरियाणा सिविल सेवा (एच.सी.एस.) के एक अधिकारी को विधानसभा सचिव पद पर नियुक्त किया है। 2016 बैच के एच.सी.एस. अधिकारी राजीव प्रसाद, जो अब तक करनाल की कोआपरेटिव शुगर मिल्स में प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत थे, को हाल ही में राज्य के कार्मिक विभाग द्वारा जारी 44 अधिकारियों की तबादला सूची में विधानसभा सचिव के पद पर तैनात किया गया है।

यह पहली बार है जब एच.सी.एस. कैडर के अधिकारी को इस उच्च पद की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, इस नियुक्ति को लेकर कुछ विधायी एवं प्रशासनिक विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी और नियमगत प्रश्न भी उठाए जा रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एडवोकेट और विधायी मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने इस विषय में स्पष्ट किया कि मौजूदा सेवा नियमों के अनुसार, विधानसभा सचिव के पद की योग्यता में एच.सी.एस. अधिकारी का उल्लेख नहीं है।

हेमंत कुमार के अनुसार, हरियाणा विधानसभा सचिवालय सेवा नियम, 1981 में सचिव पद की नियुक्ति को लेकर विभिन्न प्रावधान मौजूद हैं, जिनमें स्पीकर की भूमिका निर्णायक होती है। आमतौर पर विधानसभा सचिव की नियुक्ति सरकार द्वारा स्पीकर से परामर्श के बाद की जाती है। इस पद के लिए सीधी भर्ती, पदोन्नति, ट्रांसफर या प्रतिनियुक्ति के आधार पर अधिकारी को चुना जा सकता है, लेकिन इन सभी श्रेणियों में एच.सी.एस. का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।

विधायी नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सीधे भर्ती के माध्यम से सचिव बनता है तो उसके पास लॉ की प्रोफेशनल डिग्री होनी चाहिए और विधानसभा प्रक्रिया, सचिवालय प्रशासन, या अधीनस्थ न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय में बतौर वकील निर्धारित वर्षों का अनुभव अनिवार्य है। इसी तरह, प्रमोशन के माध्यम से अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी को एक वर्ष का अनुभव जरूरी माना गया है। इसके अतिरिक्त, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी, एडवोकेट जनरल कार्यालय में कार्यरत वरिष्ठ विधि अधिकारी या अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के न्यायिक अधिकारी को प्रतिनियुक्ति के आधार पर इस पद पर नियुक्त किया जा सकता है।

इन सभी मानदंडों के बीच एच.सी.एस. अधिकारी की नियुक्ति का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि यदि इस नियुक्ति को वैधानिक रूप देना है तो सेवा नियमों में संशोधन आवश्यक होगा। इसके बिना, राजीव प्रसाद की नियुक्ति को लेकर विधिक प्रश्न उठने की संभावना बनी रह सकती है। गौरतलब है कि हरियाणा विधानसभा के इतिहास में इससे पूर्व केवल एक बार नरेश गुलाटी नामक एक आईएएस अधिकारी को दो सप्ताह के लिए सचिव पद पर नियुक्त किया गया था।

इससे पहले, 31 मार्च 2024 को तत्कालीन विधानसभा सचिव राजेंद्र कुमार नांदल की सेवानिवृत्ति के बाद तत्कालीन स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता के ओएसडी डॉ. सतीश कुमार को सचिव पद का कार्यभार सौंपा गया था, जो अब तक अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। हालांकि, डॉ. सतीश की नियमित नियुक्ति नहीं हुई थी।

राज्य सरकार द्वारा राजीव प्रसाद की नियुक्ति एक प्रशासनिक प्रयोग के रूप में देखी जा सकती है, लेकिन इसने विधानसभा सचिव पद की नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा नियमों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार नियमों में संशोधन कर इस नियुक्ति को औपचारिक वैधता प्रदान करती है या फिर यह विवाद का विषय बनकर लंबे समय तक चर्चा में रहता है।

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