हिमाचल की सियासत में गरमा-गरमी, सुक्खू-­सुधीर की तल्ख नोकझोंक जारी

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हिमाचल प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बाद से छिड़ी जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और धर्मशाला से बीजेपी विधायक सुधीर शर्मा के बीच लगातार बयानबाज़ी हो रही है। यह विवाद 27 फरवरी 2024 को हुए राज्यसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ था, जब कांग्रेस के छह विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बीजेपी उम्मीदवार हर्ष महाजन को वोट दिया। इस क्रॉस-वोटिंग के कारण कांग्रेस के उम्मीदवार और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, कांग्रेस सरकार बहुमत बचाने में कामयाब रही और संभावित राजनीतिक संकट टल गया।

आज एक बार फिर सीएम सुक्खू ने मीडिया से बातचीत में सुधीर शर्मा पर निशाना साधा। उन्होंने शर्मा के हालिया दान पर सवाल उठाते हुए कहा, “सुधीर शर्मा ने सिराज के आपदा प्रभावितों के लिए 51 लाख और एक अन्य उद्देश्य के लिए 21 लाख रुपये का दान दिया। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने इतनी राशि अपने बैंक खाते से निकाली है। हमें देखना होगा कि यह पैसा कहां से आया और क्या इसका संबंध उनके पार्टी बदलने से है।”

सुक्खू के इन आरोपों का जवाब देने में सुधीर शर्मा ने भी देर नहीं की। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “उन्हें ‘सुधीरफोबिया’ हो गया है। मैं डरने वाला नहीं हूं, बल्कि मुझे उन पर तरस आता है।” शर्मा, जिन्होंने पिछले साल जून में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा और उपचुनाव जीते, ने आरोप लगाया कि उनके उपचुनाव में हार सुनिश्चित करने के लिए कुछ अधिकारियों के माध्यम से चंडीगढ़ से एक करोड़ रुपये भेजे गए थे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस बात के सबूत हैं।

राज्यसभा क्रॉस-वोटिंग के बाद से ही सुक्खू और शर्मा के बीच यह राजनीतिक तकरार लगातार बढ़ती जा रही है। इस घटनाक्रम ने न केवल कांग्रेस के भीतर अनुशासन और निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विपक्ष को भी हमला बोलने का मौका दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमाचल में सत्ता और पार्टी की आंतरिक राजनीति के बीच यह टकराव आने वाले समय में और तीखा हो सकता है, खासकर तब जब सरकार का बहुमत बहुत मामूली अंतर से टिका हुआ है।

कांग्रेस के छह विधायकों — सुधीर शर्मा (धर्मशाला), आईडी लखनपाल (बरसर), रवि ठाकुर (लाहौल-स्पीति), राजिंदर राणा (सुजानपुर), देवेंद्र भुट्टो (कुटलेहर) और चैतन्य शर्मा — के बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने को पार्टी हाईकमान ने गंभीर अनुशासनहीनता माना था। हालांकि, सरकार ने इस राजनीतिक झटके को झेलते हुए स्थिति संभाल ली, लेकिन इससे पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाज़ी खुलकर सामने आ गई।

मौजूदा हालात में, हिमाचल की सियासत केवल विधानसभा के भीतर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और जनसभाओं में भी गर्म है। सीएम और विधायक के बीच चल रही यह जुबानी जंग यह दर्शाती है कि आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति में और भी कई सियासी मोड़ देखने को मिल सकते हैं।

यह समाचार अंतरराष्ट्रीय समाचार वेबसाइटों से प्राप्त वेब मीडिया स्रोतों पर आधारित है।

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